उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों पर कार्रवाई को लेकर चिंता

जलगांव (अकिल खान ब्यावली)

 जलगांव ज़िला माइनॉरिटी एजुकेशनल फेडरेशन ने उत्तर प्रदेश में मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय सहित अल्पसंख्यक शैक्षणिक एवं धार्मिक संस्थानों के विरुद्ध कथित सरकारी कार्रवाई पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए भारत के राष्ट्रपति के नाम एक विस्तृत ज्ञापन जिला कलेक्टर, जलगांव के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि भारतीय संविधान के अंतर्गत अल्पसंख्यकों को प्राप्त धार्मिक स्वतंत्रता, शैक्षणिक स्वायत्तता तथा मौलिक अधिकारों की हर परिस्थिति में रक्षा सुनिश्चित की जाए।
फेडरेशन ने अपने ज्ञापन में कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 29 और 30 प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा तथा अल्पसंख्यकों को अपने शैक्षणिक संस्थान स्थापित एवं संचालित करने का अधिकार प्रदान करते हैं। यदि किसी संस्था के संबंध में कोई कानूनी अथवा प्रशासनिक अनियमितता पाई जाती है, तो उसका निराकरण विधि एवं न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप किया जाना चाहिए। ऐसी किसी भी कार्रवाई से बचा जाना चाहिए जिससे हजारों विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो अथवा उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन हो।ज्ञापन में कहा गया कि मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय वर्षों से विभिन्न धर्मों, वर्गों और क्षेत्रों के हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्रदान कर रहा है। ऐसे संस्थानों के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी कार्रवाई में पारदर्शिता, निष्पक्षता और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन किया जाना आवश्यक है, ताकि शिक्षा की निरंतरता बनी रहे और विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। फेडरेशन ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वे इस मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को संविधान की भावना और विधि के शासन के अनुरूप निष्पक्ष कार्रवाई करने के निर्देश दें, अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के अधिकारों एवं संरक्षण को सुनिश्चित करें तथा देश में संविधान की सर्वोच्चता, कानून के शासन और समान न्याय के सिद्धांतों को सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
फेडरेशन ने यह भी दोहराया कि वह शिक्षा, संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकारों तथा सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए सदैव शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और वैधानिक माध्यमों से अपनी आवाज बुलंद करता रहेगा।
ज्ञापन सौंपने के अवसर पर फेडरेशन के संस्थापक अध्यक्ष, शिक्षाविद्, सामाजिक एवं राजनीतिक नेता तथा पूर्व उपमहापौर हाजी अब्दुल करीम सालार, सामाजिक एवं राजनीतिक नेता हाजी खालिद बाबा बागवान, अयाज़ अली सैय्यद (सुन्नी ट्रस्ट), जमील शेख (तांबापुरा), पूर्व नगरसेवक ज़िया बागवान, अमजद पठान, शाहिद पटेल, रफ़ीक शेख, कुर्बान शेख, शफ़ीक शेख सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।इस अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने दिल्ली में सोनम वांगचुक के जारी आंदोलन तथा भारत मुक्ति मोर्चा द्वारा आहूत भारत बंद के संदर्भ में भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति व्यक्त करने के अधिकार, संविधान की सर्वोच्चता, कानून के निष्पक्ष अनुपालन तथा सभी नागरिकों के समान अधिकारों की हर हाल में रक्षा की जानी चाहिए।

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